- शाहजहाँ ने अपनी राजधानी आगरा की जगह दिल्ली को बनाने के लिए एक पुराने किले की जगह पर 1638 में लाल किले का निर्माण शुरू करवाया जो 1648 में पूरा हुआ।

- जब 1648 में लाल किले का उदघाटन किया गया तब इसके मुख्य कमरों को कीमती पर्दों से सजाया गया। तुर्की की मखमल और चीन की रेशम से इसकी सजावट की गई।
- इसे बनाने में करीब एक करोड़ रूपए खर्च हुए थे। इस हिसाब से यह उस समय का सबसे महंगा किला था।
- एक करोड़ रूपए में से आधी रकम इसके शानदार महलों को बनाने में खर्च की गई थी।
- शाहजहाँ ने जन्नत की कल्पना करते हुए लाल किले के अंदर के कुछ भागों का निर्माण करवाया था जिसे अंग्रेजों ने जमीन दोज़ कर दिया था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा खुदाई के दौरान लाल किले के असली तल का पता चला जो दिल्ली गेट के पास 3 फुट पर मिला है और नौबत खाने के पास इसकी गहराई छह फुट तक है।
- लाल किले के दो प्रवेश द्वार हैं। एक लाहौर गेट और दूसरा दिल्ली गेट। लाहौर गेट आम सैलानियों के लिए है और दिल्ली गेट सरकार के लिए।
- लाल किला भी ताजमहल की तरह यमुना नदी के किनारे पर बना हुआ है। लाल किले को घेरने वाली खाई को यमुना के जल से ही भरा जाता था।
- 11 मार्च 1783 ईसवी को सिखों ने लाल किले पर हल्ला बोल दिया और इसे मुगलों से आज़ाद करवा दिया। इस कारनामे का सिहरा सरदार बघेल सिंह धालीवाल को जाता है।
- लाल किले को बनाने के लिए लाल बालू पत्थरों का प्रयोग किया गया जिसके कारण ही इसका नाम लाल किला पड़ा।
- लाल किले की दीवारों की लंम्बाई 2.5 किलोमीटर है। दिवारों की ऊँचाई यमुना नदी की ओर 18 मीटर जबकि शहर की ओर 33 मीटर है।